अलवर | अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अलवर मिनी सचिवालय में हुई मीटिंग के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को अपने ही समर्थकों और ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा।
मीटिंग में जूली ने प्रशासनिक अधिकारियों—कलेक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला, CCF संग्राम सिंह और DFO अभिमन्यु साहरण—से तीखे सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि CTH में बदलाव खनन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है और इस पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य वन मंत्री संजय शर्मा का दबाव है।
मीटिंग खत्म होने के बाद टहला क्षेत्र के पालवा गांव के ग्रामीणों ने जूली को घेर लिया। कमलेश मीणा सहित 20–30 ग्रामीणों ने खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उन्हें नए CTH प्लान से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि पहले उन्हें घर बनाने के लिए पत्थर तक नहीं मिलते थे और जूली गलत जानकारी फैला रहे हैं। इस दौरान जूली समर्थकों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हुई, जो धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जूली ने आरोप लगाया कि शहर के पास के इलाकों को CTH में शामिल कर दूर के क्षेत्रों को हटाया जा रहा है, जो एक बड़ा घोटाला है। उन्होंने कहा कि यदि बाघों की संख्या या प्रजनन प्रभावित होता, तो बदलाव समझ में आता, लेकिन यहां खनन हित हावी हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और “दूध का दूध, पानी का पानी” किया जाए।
आपको बता दें कि क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) वह संरक्षित वन क्षेत्र होता है, जहां बाघों की आवाजाही और प्रजनन सबसे अधिक होता है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है, जहां मानवीय गतिविधियां प्रतिबंधित रहती हैं। सरिस्का में पहले टहला क्षेत्र CTH का हिस्सा था, जिसे अब बाहर करने का प्रस्ताव है। वहीं, दूसरे इलाकों को CTH में जोड़ा जा रहा है। इस बदलाव के कारण दोनों पक्षों—ग्रामीणों और पर्यावरण समर्थकों—में विरोध देखने को मिल रहा है।