राजगढ़ जिले के ब्यावरा से सामने आई 20 साल के एक युवा की कहानी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रही है। ये कहानी है BSC छात्र बिट्टू ‘तबाही’ उर्फ सुरेंद्र चौधरी की, जिसने अजनार नदी की हालत देखकर उसे साफ करने का बीड़ा उठाया। खास बात ये है कि बिट्टू और उसके दोनों दोस्तों को तैरना तक नहीं आता था, फिर भी तीनों नदी के गंदे पानी में उतर गए। दरअसल, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के बाद बिट्टू, कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल ने अजनार नदी को साफ करने का संकल्प लिया। तीनों दोस्त अक्सर नदी किनारे क्रिकेट खेलने जाते थे, लेकिन घाट पर प्लास्टिक, पूजा सामग्री और कचरे का ढेर देखकर परेशान होते थे। बिट्टू ने दोस्तों से कहा कि क्यों न ऐसा काम किया जाए, जिससे लोगों को सच में बदलाव दिखाई दे। इसके बाद तीनों ने सफाई अभियान शुरू कर दिया। सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि तीनों को तैरना नहीं आता था। इसके बावजूद उन्होंने ग्लव्स, जूते, जाल और कचरा निकालने के लिए जरूरी उपकरण जुटाए और नदी में उतरकर सफाई शुरू कर दी। शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक बनाया, सोशल मीडिया पर ट्रोल किया और कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वे सिर्फ लाइक्स और पब्लिसिटी के लिए ऐसा कर रहे हैं। लेकिन तीनों दोस्तों ने किसी की परवाह नहीं की और अपना काम जारी रखा। कई बार वे घर से क्रिकेट खेलने की बात कहकर निकलते और नदी के घाट पर पहुंचकर घंटों सफाई करते। परीक्षा के दौरान भी उन्होंने सफाई अभियान नहीं छोड़ा। गंदे पानी में लगातार उतरने से तीनों के हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन हुआ और कई बार बुखार भी आया, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। एक बार तो सफाई के दौरान बिट्टू के पैर के पास सांप भी आ गया। गनीमत रही कि उस वक्त उसने बड़े जूते पहन रखे थे। बिट्टू ने अपनी पॉकेट मनी बचाकर सफाई के सामान खरीदे। अब तक करीब 30 हजार रुपये अपनी जेब से खर्च करने की बात सामने आई है। ड्रम, पेंट, जाल, ग्लव्स, जूते और दूसरे उपकरणों का इंतजाम उन्होंने खुद किया। तीनों दोस्तों ने अब तक करीब तीन घाटों की सफाई की है। जिस जगह कभी कचरे का ढेर लगा रहता था, वहां अब सफाई और पुताई के बाद लोग घूमने और बैठने भी आने लगे हैं। बिट्टू की सोच सिर्फ कचरा हटाने तक सीमित नहीं है। नदी से निकलने वाली पूजा सामग्री को अलग किया जा रहा है और उससे कंपोस्ट बनाने की कोशिश भी की जा रही है। वहीं प्लास्टिक और दूसरे कचरे को भी दोबारा इस्तेमाल या रीसाइकिल करने की योजना है। इन युवाओं के सफाई अभियान के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो ब्यावरा की अजनार नदी की कहानी देश-दुनिया तक पहुंच गई। मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी इनके प्रयास की सराहना की। इसके बाद इन तीनों दोस्तों की मुहिम को लेकर चर्चा और बढ़ गई। और फिर आया वो पल, जिसने बिट्टू की मेहनत को एक नई पहचान दे दी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिट्टू को भोपाल बुलाया। CM हाउस में मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उसकी पीठ थपथपाई और उसके काम की जमकर सराहना की। मुख्यमंत्री ने बिट्टू को ‘जय श्री महाकाल’ का दुपट्टा पहनाया और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को लेकर कहा कि सरकार पिछले तीन वर्षों से कुएं, बावड़ी, नदी और तालाब जैसे जल स्रोतों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बिट्टू की पहल को इसी दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास बताया और युवाओं से जल संरक्षण के काम में आगे आने की अपील की। लेकिन मुख्यमंत्री के सामने बिट्टू ने जो बात कही, वो शायद इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी सीख है। बिट्टू ने कहा कि सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। क्योंकि सिर्फ नदी को साफ कर देना काफी नहीं है। जब तक लोग दोबारा नदी में कचरा डालना बंद नहीं करेंगे, तब तक सफाई अभियान अधूरा रहेगा। बिट्टू की अपील है कि जिस तरह लोग अपने घर को साफ रखते हैं, उसी तरह अपने आसपास के पर्यावरण और जल स्रोतों को भी साफ रखें। अगर कहीं गंदगी दिखाई दे तो सिर्फ शिकायत करने के बजाय खुद आगे आएं और बदलाव की शुरुआत करें। आज बिट्टू ‘तबाही’ नाम से ज्यादा अजनार नदी की सफाई करने वाले उस युवा के रूप में पहचाना जा रहा है, जिसने साबित किया कि बदलाव के लिए उम्र बड़ी नहीं, सोच बड़ी होनी चाहिए। जिस काम की शुरुआत तीन दोस्तों ने बिना किसी बड़े संसाधन के की थी, वही काम आज मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है और हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। ये कहानी सिर्फ एक नदी की सफाई की कहानी नहीं है... ये कहानी है जिम्मेदारी की, जुनून की और उस हिम्मत की, जो कहती है कि अगर बदलाव चाहिए तो किसी दूसरे का इंतजार मत करो... पहला कदम खुद उठाओ।
एक 20 साल का युवा अगर नदी में उतरकर बदलाव की शुरुआत कर सकता है, तो हम अपने आसपास के पर्यावरण के लिए इतना तो कर ही सकते हैं।